Poverty in India and its causes in Hindi

Poverty in India Hindi

Poverty in India introduction: गरीबी एक ऐसा शब्द है जो सुनने में बहुत ही दयनीय लगता है|

गरीबी का सामन्य सी भाषा में अर्थ होता है|

जो व्यक्ति अपनी बेसिक आवयश्कता को पूरा नहीं कर पता है|

तो वह गरीबी के अंतर्गत माना जाता है अब किसी की भी बेसिक नीड की बात करे तो उसमे हम मानते है|

रोटी, कपड़ा और मकान ये जिस व्यक्ति के पास ना हो तो उसे गरीबी के अधीन मानते है|

अगर आप गरीबी के बारे में सब कुछ जानना चाहते है|

तो आपको हमारी इस वेबसाइट पर दिए गए आर्टिकल को पूरा पढ़ना होगा

आइये आपको ले चलते है Poverty in India क्या है|

Definition of poverty in India

भारत में पहली बार Poverty को 1962 में परिभाषित किया गया था |

Poverty  को परिभषित करने के सबसे पहले हमे Poverty से जुड़े दो तथ्यों को जाना बहुत जरूरी है
1. Relative poverty
2. Absolute poverty

भारत में Absolute poverty  को सबसे पहले Indian council of medical researchप्लानिंग कमीशन की वर्किंग ग्रुप ने बैलेंस डाइट के अनुसार परिभाषित किया था |

उनके अनुसार पावर्टी को अगर शहरी क्षेत्र में अगर 20% प्रति कैपिटा /महीना

ग्रामीण क्षेत्र में 25% प्रति कैपिटा / महीना आरक्षित की गयी थी|

उसके बाद 1969 व्. म दांडेकर और नीलकंठ रथ ने पावर्टी को कैलोरी के टर्म में परिभाषित किया |

ये भारत की छठवीं पंचवर्षीय योजना थी उनके अनुसार शहरी क्षेत्र में 2100 कैलोरी प्रति व्यक्ति and ग्रामीण क्षेत्र में 2400 कैलोरी प्रति व्यक्ति के उपयोग से है|

जो व्यक्ति इतनी कैलोरी नहीं जुटा पाते है वो Poverty के अधीन आते है|

Relative Poverty को हिंदी में सापेक्ष निर्धनता कहते है|

and  relative property को यूरोपियन देशो में मापते है, सापेक्ष निर्धनता के अनुसार poverty  यह है की यदि किसी व्यक्ति की सालाना आय 725  US $ डॉलर से कम है|

लोग खुद को गरीब महसूस करते हैं और दूसरों को गरीब समझते हैं

कि अगर उनके पास आम लोगों की तुलना में कम है तो उनके समाज में दूसरों की गरीबी क्या है, इस दृष्टि से गरीबी सापेक्ष अभाव है

Poverty का अर्थ क्या है : Meaning of poverty in India :

भारत  विकासशील देश की श्रेणी में आता है और स्वतंत्रता के बाद से भारत Poverty से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है|

भारत एक अधिक जनसँख्या वाला देश है और यहा की साक्षरता की दर भी बहुत काम है|

और भारत निरंतर poverty  फैलती जा रही है and Poverty को कम और जड़ से ख़त्म करने के लिए सरकार नीति बनाती रहती है|

Causes of poverty in India : कॉसेस ऑफ़ पावर्टी इन इंडिया :

भारत में गरीबी या निर्धनता के बहुत से कारण है जिनके चलते गरीब और गरीब होता जा रहा है|

आजादी के बाद सात दशक बाद इतनी साडी पंचवर्षीय योजनाओ के बाद भी गरीबी ने सभी की कमर तोड़ के रखी है|

आइये जानते है की तकनीकी के इस युग में भी गरीबी इतनी बढ़ती जा रही है |

आइये कुछ ऐसे ही महत्वपूर्ण बिन्दुओ पर जिनके कारण गरीबी फैलती जा रही है

गरीबी जिस दर से फैलती जा रही है इसके पीछे विभिन्न कारण हो सकते है| आजादी से लेकर आज तक भी गरीबी एक प्रमुख समस्या बनी हुई है| और इसके निवारण हेतु जितनी भी नीतिया और योजनाए बनाई गयी सभी ठीक प्रकार से सफल नहीं हो पायी है |ये भी गरीबी को न हटाए जाने पर एक सवाल खड़ा करता है

भारत में गरीबी के लिए बहुत से तथ्य उल्लेखनीय है जो नीचे दिए गए है

  • आजादी के बाद से ही सरकार ने बहुत सी योजनाए लागु की पर
  • उन योजनाओ को पूरा करने के लिए कहीं ना कहीं कार्यकारिणी का आभाव और दिशा निर्देश की कमी थी
  • जिसके कारन ये योजना कुछ प्रतिशत तक असफल रही थी
  • आज भी गरीबी को हटाने के लिए बहुत सी योजनाए बनाई जाती है परन्तु गरीबी जहाँ था आज भी वहीं ही है इसका मुख्या कारन है
  • की जो योजनाए बनाई जाती है वो गरीबो को पता नहीं चलती है और वो इसका लाभ नहीं ले पाते है
  • भारत के आर्थिक विकास की द्रष्टि से कितने वर्षो से भारत विकास से पिछड़ता ही जा रहा है}|
  • जिसके कारण गरीबी की समस्या का हल अभी तक नहीं हो सका है|
  • 1950 से1980 तक की भारत की आर्थिक विकास की दर ३.५ % दुनिया हिन्दू विश्व दर के नाम से प्रसिद्ध हुई थी|
  • आज भी भारत विकासशील देशो की लिस्ट में ही आता है|
  • भारत में निर्धनता के बढ़ने का प्रमुख कारण जनसँख्या की वृद्धि भी है|

जनसँख्या की द्रष्टि:

जनसँख्या की द्रष्टि से भारत विश्व में दूसरे नंबर पर आता है |

अधिक जनसँख्या होने से विकास दर कम होती है जिसके कारण गरीबी फैलती जा रही है|

वित्तीय संसाधनों के आभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगो को रोजगार के अवसर नहीं मिल पाते है

जिसके कारण गरीब और गरीब होते जा रहे है |

शिक्षा की द्रष्टि:

शिक्षा का समान अधिकार होने पर भी ग्रामीण उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते है|

ये गरीबी का ही कारण होता है|

तकनीकी का अभाव के कारण उत्पादन के क्षेत्र में भारत को सफलता कम ही हाथ लगी है|

जिससे आर्थिक विकास भी कम ही हुआ है|

प्राकृतिक आपदाये भी आर्थिक विकास की दर को कम करती है|

जैसे समय समय परप्राकृतिकआपदाये भी आती रहती हैउनके कारण आर्थिक विकास की दर भी गड़बड़ा जाती है|

भारत में गरीबी पर आर्थिक विकास दर और असमानता के सापेक्ष प्रभाव:

यह खंड इस बात की जाँच करता है कि क्या भारत में प्रति व्यक्ति आय या असमानता भारत में गरीबी को चार साल के लिए सबसे अधिक प्रभावित करती है,
(1993,1999,2004,2011) एक समग्र मजबूत नकारात्मक रिश्ते का संकेत देता है|
जिसका अर्थ है कि अधिक आय या उच्च प्रति व्यक्ति शुद्ध घरेलू घरेलू उत्पाद का अनुभव असमानता और गरीबी के बीच अनुपस्थित है|
World Bank(विश्व बैंक)  की एक रिपोर्ट के अनुसार सन 2000 में पाया गया है कि भारत 1970 से 1990 के दौरान गरीबी में निरंतर गिरावट हासिल कर सकता है,
परन्तु जब भी जीडीपी विकास दर बढ़ी और गरीबी भी बढ़ रही थी|
औसत उपभोग की वृद्धि दर में लगभग 87 प्रतिशत की गिरावट के लिए जिम्मेदार थी, जबकि पुनर्वितरण का योगदान केवल 13 था प्रतिशत था|